समाज गौरव: संघर्ष, सेवा और समर्पण के प्रतीक – श्री भूपेंद्रजी देवासी (देवाड़ा)
राजस्थान की पावन धरती, विशेषकर जालौर–सिरोही अंचल, सदैव वीरों, संतों और कर्मशील जननायकों की भूमि रही है। इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए देवासी (रबारी) समाज में एक ऐसा नाम उभरकर सामने आया है, जिसने अपने संघर्ष, समर्पण और सहज व्यक्तित्व से समाज और राजनीति दोनों में विशिष्ट पहचान बनाई—आदरणीय श्री भूपेंद्रजी देवासी (देवाड़ा)।
एक साधारण गोपालक परिवार में जन्मे श्री भूपेंद्रजी का प्रारंभिक जीवन संघर्षों से भरा रहा। उनके माता-पिता पशुपालन के माध्यम से जीवनयापन करते हुए हरियाणा और पंजाब जैसे प्रदेशों में कठिन परिस्थितियों में परिश्रम करते रहे। यही संस्कार और श्रमशीलता उनके जीवन की आधारशिला बने। बाल्यकाल से ही उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ पारिवारिक व्यवसाय में सहयोग करते हुए जीवन के वास्तविक संघर्षों को नज़दीक से समझा।
विद्यालय जीवन से ही उनके भीतर नेतृत्व के गुण स्पष्ट दिखाई देने लगे थे। मिलनसार स्वभाव, सरलता, और हर व्यक्ति के प्रति सम्मान एवं प्रेम भाव उनके व्यक्तित्व की पहचान बन गया। वे सदैव अपने चेहरे पर मुस्कान लिए, समाज के हर वर्ग—छत्तीस कौम—के लोगों से आत्मीयता के साथ जुड़ते रहे। यही गुण आगे चलकर उन्हें जन-जन का प्रिय बना गए।
राजनीतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से की और निरंतर संघर्ष, समर्पण एवं निष्ठा के साथ संगठन में अपनी मजबूत पहचान स्थापित की। पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के रूप में उन्होंने जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए जनता की समस्याओं को समझा और उनके समाधान हेतु सक्रिय भूमिका निभाई। संगठन में उनकी कार्यकुशलता और सक्रियता को देखते हुए उन्हें प्रदेश स्तर पर भी विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करने का अवसर प्राप्त हुआ।
विशेष रूप से राजस्थान में भाजपा सरकार के दौरान, आदरणीय श्रीमती वसुंधरा राजे जी के नेतृत्व में उन्हें पशुपालक कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष पद (राज्यमंत्री) की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस पद पर रहते हुए उन्होंने पशुपालक समाज के हितों की रक्षा, उनके अधिकारों की आवाज़ बुलंद करने तथा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर लाने के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। उनका यह कार्यकाल समाज सेवा और संघर्ष की मिसाल बन गया।
समाज के अधिकारों और न्याय की लड़ाई में भी श्री भूपेंद्रजी सदैव अग्रणी रहे। चाहे वह आरक्षण आंदोलन हो, धरना-प्रदर्शन हो या किसी पीड़ित, शोषित और प्रताड़ित व्यक्ति की सहायता—उन्होंने हर मोर्चे पर आगे बढ़कर समाज की आवाज़ को सशक्त किया। शासन और प्रशासन के साथ संवाद स्थापित कर समस्याओं के समाधान हेतु उनकी सक्रियता सराहनीय रही है।
आस्था और संस्कृति के क्षेत्र में भी उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। सिरोही जिले के पावन श्री सारणेश्वर महादेव मंदिर, जो रबारी समाज की आस्था का केंद्र है, वहां उन्होंने दो बार मेले के लाभार्थी बनकर सेवा का पुण्य अर्जित किया। यही नहीं, उन्होंने मंदिर परिसर में धर्मशाला एवं रसोईघर का निर्माण करवाकर समाज को एक अमूल्य धरोहर प्रदान की। यह कार्य उनके नाम को इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित करता है।
उनका जीवन केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज सेवा, संस्कृति संरक्षण और मानवता के मूल्यों का जीवंत उदाहरण है। वे हर छोटे-बड़े कार्यक्रम में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराते हैं—चाहे वह जालौर, सिरोही, पाली या बाड़मेर का कोई आयोजन हो—उनकी भागीदारी समाज के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती है।
श्री भूपेंद्रजी देवासी आज एक ऐसे युवा नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित हैं, जिनसे समाज को वर्तमान में ही नहीं, बल्कि भविष्य में भी अनेक अपेक्षाएँ हैं। उनकी कार्यशैली, जनसंपर्क और संगठनात्मक क्षमता उन्हें प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक एक सशक्त नेतृत्व के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर कर रही है।
निस्संदेह, ऐसे कर्मठ, सरल, और समर्पित व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं। श्री भूपेंद्रजी देवासी न केवल देवासी समाज की शान हैं, बल्कि वे उस नई सोच और सशक्त नेतृत्व के प्रतीक हैं, जो समाज को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।
ऐसे महान समाजसेवी और कर्मयोगी व्यक्तित्व को नमन, अभिनंदन एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ।
