तपस्या और चमत्कार
एक बार सिणधरी जाते समय, कालूड़ी गांव के पास उन्हें प्यास लगी। जब गांव वालों ने उन्हें पानी नहीं दिया, तो उन्होंने श्राप दिया कि पिचके का पानी खारा हो जाएगा। इसके बाद वे भूका वेरी गांव गए और वहां बावड़ी खोदकर पानी पिया।
सिणधरी में उन्होंने मोताजी माजन के यहां हाली रहकर गाय चराई और भक्ति में लीन रहे। बाद में उनकी सगाई दोनाजी देवासी की बेटी अगरीदेवी से हुई और वे घर जवाई बनकर वहां रहने लगे। एक दिन, जब वे जंगल में ध्यानमग्न थे, उनके ससुर ने उनकी परीक्षा लेने के लिए उनके भोजन में गोबर का उबला साणा रख दिया। जब जेताराम जी ने ध्यान से उठकर भोजन किया, तो वह साणा चूरमा में बदल गया और पानी ठंडा हो गया। इस चमत्कार को देखकर उनके ससुर ने क्षमा मांगी।
एक अन्य घटना में, जब एक बकरी को मार दिया गया, तो जेताराम जी ने उसे पुनः जीवित कर दिया। इन चमत्कारों से प्रभावित होकर, उन्होंने अपने ससुर की बेटी गवरीदेवी को बहन बना लिया और तपस्या के लिए निकल पड़े।
