February 21, 2026
Bhinmal - Jalore (Raj)
श्री जेतेश्वर धाम, राजस्थान के बाड़मेर जिले के सिणधरी क्षेत्र में स्थित है और यह देवासी समाज के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यह धाम श्री 1008 जेताराम जी महाराज की तपोभूमि है, जिन्हें समाज के मार्गदर्शक और संत के रूप में पूजा जाता है।

श्री जेताराम जी महाराज का जीवन परिचय

जेताराम जी महाराज का जन्म विक्रम संवत 1812 (लगभग 1755 ई.) में राजस्थान के बाड़मेर जिले के काठाड़ी गांव में हुआ था। उनकी माता का नाम ओखी देवी और पिता का नाम उमा जी गेलोतर था। बाल्यकाल से ही वे भक्ति में लीन रहते थे और सांसारिक मोह-माया से दूर रहते थे। किशोरावस्था में वे बालोतरा में मालियों की बाड़ी की रखवाली करते थे और जो धान मिलता था, उसे कबूतरों को खिला देते थे।

तपस्या और चमत्कार

एक बार सिणधरी जाते समय, कालूड़ी गांव के पास उन्हें प्यास लगी। जब गांव वालों ने उन्हें पानी नहीं दिया, तो उन्होंने श्राप दिया कि पिचके का पानी खारा हो जाएगा। इसके बाद वे भूका वेरी गांव गए और वहां बावड़ी खोदकर पानी पिया।

सिणधरी में उन्होंने मोताजी माजन के यहां हाली रहकर गाय चराई और भक्ति में लीन रहे। बाद में उनकी सगाई दोनाजी देवासी की बेटी अगरीदेवी से हुई और वे घर जवाई बनकर वहां रहने लगे। एक दिन, जब वे जंगल में ध्यानमग्न थे, उनके ससुर ने उनकी परीक्षा लेने के लिए उनके भोजन में गोबर का उबला साणा रख दिया। जब जेताराम जी ने ध्यान से उठकर भोजन किया, तो वह साणा चूरमा में बदल गया और पानी ठंडा हो गया। इस चमत्कार को देखकर उनके ससुर ने क्षमा मांगी।

एक अन्य घटना में, जब एक बकरी को मार दिया गया, तो जेताराम जी ने उसे पुनः जीवित कर दिया। इन चमत्कारों से प्रभावित होकर, उन्होंने अपने ससुर की बेटी गवरीदेवी को बहन बना लिया और तपस्या के लिए निकल पड़े।

स्थापना

श्री जेतेश्वर धाम की स्थापना

सिणधरी के रावल गोदरसिंह जी से जब उन्होंने आश्रम के लिए जमीन मांगी और मना किया गया, तो उन्होंने अपनी धर्म बहन कवरीबाई कांचेली चारणी के गांव डातेरी में तपस्या की। बाद में रावल साहब ने उनकी तपस्या से प्रभावित होकर उन्हें जमीन दी, जहां उन्होंने अपना आश्रम स्थापित किया। यह स्थान आज "जेताराम जी की प्याऊ" के नाम से जाना जाता है। यहां उन्होंने जालकी पेड़ की डाली से दांतुन कर उसे रोप दिया, जो आज भी एक बड़े पेड़ के रूप में विद्यमान है।

महत्व

आध्यात्मिक महत्व

श्री जेताराम जी महाराज ने अपने जीवन में अनेक चमत्कार किए और समाज को भक्ति, सेवा और तपस्या का मार्ग दिखाया। उनकी समाधि स्थल पर आज भी श्रद्धालु दूर-दूर से आकर दर्शन करते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।