April 10, 2026
Bhinmal - Jalore (Raj)

शिक्षा दान: पीढ़ियों तक चलने वाला सबसे बड़ा पुण्य

समस्त समाज बंधुओं को यह बताते हुए अत्यंत हर्ष और गर्व का अनुभव हो रहा है कि वर्तमान युग शिक्षा, ज्ञान और तकनीक का युग है। इक्कीसवीं सदी में वही समाज प्रगति के पथ पर अग्रसर है, जो शिक्षा को अपने जीवन और संस्कारों का मूल आधार बना रहा है। शिक्षा ही वह शक्ति है, जो व्यक्ति को सशक्त बनाकर उसे समाज का मार्गदर्शक बनाती है।

इसी शिक्षा-क्रांति के पथ पर चलते हुए हमारे देवासी समाज के सच्चे दानवीर भामाशाह, रोपसी ग्राम निवासी श्रीमान मेहराराम जी पुत्र श्री परखा जी नौगु एवं उनके परिवार द्वारा किया गया यह पुण्य कार्य अत्यंत अनुकरणीय और प्रेरणादायक है।

ग्रामीण परिवेश से निकलकर, सीमित संसाधनों में शिक्षा प्राप्त करते हुए, कठिन परिश्रम और ईमानदारी के बल पर विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश) जैसे दूरस्थ क्षेत्र में व्यापार के क्षेत्र में अपनी सशक्त पहचान स्थापित करना और फिर उस अर्जित संपदा को समाज के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए समर्पित करना—यह सच्चे अर्थों में भामाशाही परंपरा का जीवंत उदाहरण है।

भामाशाह द्वारा रानीवाड़ा मुख्यालय स्थित देवासी समाज छात्रावास में आधुनिक सुविधाओं से युक्त पुस्तकालय का निर्माण करवाकर, उसका संपूर्ण फर्नीचर एवं अध्ययन-अनुकूल वातावरण तैयार करना, विद्यार्थियों के लिए एक अमूल्य उपहार है। यह पुस्तकालय केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि ज्ञान, आत्मविश्वास और उज्ज्वल भविष्य की प्रयोगशाला है।

आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में, जहाँ प्रत्येक विद्यार्थी अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्षरत है, वहाँ इस प्रकार की सुविधा उन्हें नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करेगी। आने वाले समय में सैकड़ों विद्यार्थी इस पुस्तकालय से लाभान्वित होकर समाज, प्रदेश और राष्ट्र का नाम रोशन करेंगे।

यह सर्वविदित है कि शिक्षा दान सबसे महान दान है। यह वह पुण्य है, जिसका फल पीढ़ियों तक मिलता है। आपका यह योगदान न केवल वर्तमान, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी उज्ज्वल बनाएगा।

हम आशा करते हैं कि आपके इस प्रेरणादायक कार्य से समाज के अन्य सक्षम भामाशाह भी प्रेरित होंगे और शिक्षा के क्षेत्र में अपना योगदान देंगे।

समस्त देवासी समाज की ओर से आपको एवं आपके परिवार को इस महान कार्य के लिए हृदय से धन्यवाद, आभार एवं साधुवाद।